हताशा से एक व्यक्ति बैठ गया थाव्यक्ति को मैं नहीं जानता था हताशा को जानता थाइसलिए मैं...
कविता
जो मेरे घर कभी नहीं आएँगेमैं उनसे मिलने उनके पास चला जाऊँगा।एक उफनती नदी कभी नहीं आएगी...
मेरा प्रेम खून की तरह बहाजाँघों के बीच से, चादर तकिये भिगोता हुआसफ़ेद ज़मीन को लाल करता...
जो पुल बनाएँगेवे अनिवार्यत: पीछे रह जाएँगे।सेनाएँ हो जाएँगी पार मारे जाएँगे रावणजयी होंगे राम, जो निर्माता...
दोपहर मेंसूरज के तिखे धूप मेंजब उचट जाता है मन,पलकें समेटतीझुंझलाने लगती है आँखेंतब याद आता हैउषा...
मैं तुम लोगों से इतना दूर हूँतुम्हारी प्रेरणाओं से मेरी प्रेरणा इतनी भिन्न है कि जो तुम्हारे...
कुछ औरतों नेअपनी इच्छा से कुएँ में कूदकर जान दी थी,ऐसा पुलिस के रिकार्डों में दर्ज है।...