रिपोटिंग by Rahul
वेनेज़ुएला की राजधानी काराकास में शनिवार को अचानक से सैन्य कार्रवाई के बाद अमेरिका ने वेनेज़ुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सीलिया फ्लोरेंस को ‘पकड़ लिया है. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि मादुरो को वेनेजुएला की सत्ता से हटा दिया गया और जब तक देश में राजनीतिक बदलाव नहीं हो जाता है तब तक अमेरिका अस्थायी रूप से देश को चलाएगा।
ट्रंप का आरोप है कि निकोलस मादुरो ड्रग्स तस्करी, भारी हथियारों और दूसरे तरीकों से अमेरिका के हितों को नुकसान पहुंच रहे हैं। लेकिन जानकारों को कुछ और ही कहना है। ऐसा कहा जा रहा है कि अमेरिका को दिलचस्पी वेनेजुएला के सोना और तेल भंडार में है।
दरअसल, वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा कच्चे तेल का भंडार है। इसके साथ ही भारी मात्रा में सोना और दूसरे खनिजों का भी भंडार है। वेनेजुएला के पास 303 अरब बैरल कच्चा तेल मौजूद है।
वेनेजुएला के गुयाना शील्ड क्षेत्र में 10,000 टन से अधिक निकालने योग्य सोने का अनुमान है। इसमें ओरिकोनो माइनिंग आर्क क्षेत्र में 8 हजार टन से अधिक सोना शामिल है। वेनेजुएला के केंद्रीय बैंक के पास 161 टन से अधिक सोने का भंडार है। यह साउथ अमेरिका में सबसे बड़े सोने के भंडार वाला देश है। तेल और सोने के अलावा वेनेजुएला में बॉक्साइट, निकल और कई दुर्लभ खनिजों का भी बड़ा भंडार है।

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इस घटनाक्रम पर अन्य देशों ने क्या कहा?
डी.डब्ल्यू. की रिपोर्ट के अनुसार,
रूस ने अमेरिकी हमले की निंदा की और इसे “वेनेजुएला के खिलाफ सशस्त्र आक्रमण” बताया. रूसी विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा, “यह बहुत चिंताजनक और निंदनीय है. इस तरह की कार्रवाई का औचित्य साबित करने के लिए जो बहाने इस्तेमाल किए गए, उनका समर्थन नहीं किया जा सकता.” रूस ने यह भी कहा कि विचारधारा संबंधी शत्रुता ने व्यावहारिक नीति को हरा दिया.
मादुरो सरकार के करीबी सहयोगियों में से एक ईरान ने वॉशिंगटन की निंदा की है. ईरान ने कहा कि वह “वेनेजुएला पर अमेरिका के सैन्य हमले की सख्त निंदा करता है.” ईरान ने इस हमले को वेनेजुएला की राष्ट्रीय संप्रभुता और भूभागीय अखंडता का उल्लंघन बताया. खुद तेहरान के भी अमेरिका के साथ काफी तनावपूर्ण रिश्ते हैं.
गुस्तावो पेत्रो, वेनेजुएला के पड़ोसी देश कोलंबिया के राष्ट्रपति हैं. उन्होंने इसे लैटिन अमेरिका की “संप्रभुता पर हमला” करार दिया. कोलंबिया इस साल संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) का अस्थायी सदस्य है. उसने जल्द यूएनएससी की बैठक बुलाने की मांग की है.
क्यूबा, वेनेजुएला का पारपंरिक क्षेत्रीय सहयोगी है. उसने इस हमले को “वेनेजुएला के बहादुर लोगों के खिलाफ सरकार का आतंकवाद” बताया. क्यूबा के राष्ट्रपति, मिगेल दिआज कनेल ने एक बयान जारी कर अंतरराष्ट्रीय समुदाय से काराकस पर हुए “आपराधिक आक्रमण” पर जवाब देने की अपील की.
यूरोपीय देश स्पेन ने शांतिपूर्ण समाधान की तलाश के लिए मध्यस्थता का प्रस्ताव दिया है. विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा, “स्पेन, तनाव कम करने और संयम की अपील करता है. हम लोकतांत्रिक, वार्ता आधारित और शांतिपूर्ण समाधान की तलाश में मदद करने के लिए तैयार हैं.”
जर्मन विदेश मंत्रालय ने समाचार एजेंसी एएफपी से कहा, “हम वेनजुएला की स्थितियों को बहुत गौर से देख रहे हैं और ताजातरीन खबरों पर बहुत चिंता के साथ नजर रख रहे हैं. विदेश मंत्रालय, काराकस स्थित दूतावास के साथ करीबी संपर्क में है.” जर्मनी ने यह भी कहा कि संकटकालीन मामलों को देखने वाली सरकार की टीम इस विषय पर बैठक रही है.
इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के दफ्तर ने कहा कि वह वेनेजुएला के हालात की निगरानी कर रही हैं और विदेश मंत्री के साथ लगातार संपर्क में हैं.

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भारत ने क्या कहा?
बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार,
भारतीय विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया, “वेनेज़ुएला में हालिया घटनाक्रम गहरी चिंता का विषय है. हम वहां की बदलती स्थिति पर क़रीबी नज़र रखे हुए हैं.”
भारतीय विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा, “भारत वेनेज़ुएला के लोगों की सुरक्षा और उनकी भलाई के लिए अपने समर्थन को फिर से दोहराता है. हम सभी संबंधित पक्षों से अपील करते हैं कि मुद्दों का समाधान बातचीत के ज़रिए और शांतिपूर्ण तरीक़े से किया जाए, ताकि क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनी रहे.”
इससे पहले भारत ने शनिवार रात अपने नागरिकों को वेनेज़ुएला की यात्रा को लेकर एक एडवाइज़री जारी की थी. भारत सरकार ने लोगों से कहा था कि वे वेनेज़ुएला की सभी गै़र-ज़रूरी यात्राओं से बचें.

राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा सोशल मीडिया पर साझा की गई एक तस्वीर, जिसके बारे में उन्होंने कहा कि उसमें वेनेज़ुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को अमेरिकी युद्धपोत यू.एस.एस. इवो जिमा पर हिरासत में दिखाया गया है।
वेनेज़ुएला के बाद ट्रंप ने भारत को दी धमकी।
ख़बरगाँव की रिपोर्ट के अनुसार,
एयर फोर्स वन में पत्रकारों को संबोधित करते हुए ट्रंप ने कहा, “अगर भारत रूसी तेल मुद्दे पर मदद नहीं करता है तो हम उस पर टैरिफ बढ़ा सकते हैं.” अमेरिकी सेना के प्रमुख ने दावा किया कि भारत ने रूस से तेल की खरीद में काफी कमी की है.
ट्रंप की यह नई चेतावनी रूस के साथ भारत के ऊर्जा व्यापार पर चल रहे अमेरिकी दबाव के बीच आई है. हालांकि, भारत घरेलू ऊर्जा सुरक्षा के लिए रूस से तेल खरीद को जरूरी बताता रहा है. ट्रंप के ये बयान प्रधानमंत्री मोदी से हाल में हुई उनकी बातचीत के बाद आई हैं, जिसमें दोनों नेताओं ने टैरिफ संबंधी तनाव के बावजूद द्विपक्षीय व्यापार संबंधों में गति बनाए रखने के महत्व पर जोर दिया था.