नेपाल की राजनीति में 5 मार्च 2026 में होने वाले आम चुनावों से पहले बड़ा राजनीतिक बदलाव देखने को मिल रहा है। काठमांडू के लोकप्रिय मेयर और पूर्व रैपर Balendra Shah (बालेन शाह) ने प्रधानमंत्री पद की दौड़ में उतरने से राजनीतिक गलियारों में खलबली मच गई है। उन्होंने सुधारवादी छवि वाली Rastriya Swatantra Party (RSP) के साथ मिलकर नेपाल की पारंपरिक राजनीति को खुली चुनौती दी है। यह घटनाक्रम नेपाल में उभर रही नई राजनीतिक सोच का संकेत माना जा रहा है।
कौन हैं बालेंद्र शाह?
Gen Z आंदोलन के दौरान चर्चा में आये बालेंद्र शाह का सफर पारंपरिक नेताओं से बिल्कुल अलग रहा है। राजनीति में आने से पहले वे नेपाल के अंडरग्राउंड रैप म्यूज़िक सीन में सक्रिय थे। उनके गानों में भ्रष्टाचार, सिस्टम की खामियां और युवाओं की निराशा खुलकर सामने आती थी। यही वजह है कि वे पहले से ही युवाओं के बीच लोकप्रिय चेहरा बन चुके थे। वर्ष 2022 में बालेन शाह ने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर काठमांडू मेयर का चुनाव लड़कर ऐतिहासिक जीत दर्ज की। इन्होंने इंजीनियरिंग की उच्च शिक्षा कर्नाटक के विश्वेरैया इंजीनिरिंग कॉलेज में दो साल रहकर हासिल की। हालांकि बालेंद्र शाह भारत को लेकर कई बार विरोधी बयान दे चुके हैं।

मेयर के रूप में बालेंद्र शाह का कामकाज
काठमांडू के मेयर बनने के बाद बालेन शाह ने खुद को सिर्फ सोशल मीडिया नेता तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने प्रशासनिक स्तर पर कई कड़े और चर्चित फैसले लिए। अवैध निर्माण और अतिक्रमण पर सख्त कार्रवाई, ट्रैफिक व्यवस्था और शहरी प्रबंधन में सुधार,भ्रष्टाचार के खिलाफ खुली और सार्वजनिक मुहिम -इन फैसलों से उन्हें युवाओं और आम नागरिकों का समर्थन मिला, हालांकि कुछ कारोबारी और राजनीतिक समूह उनसे नाराज़ भी हुए। इसके बावजूद, उनकी एक्शन लेने वाले नेता की छवि और मजबूत होती गई।
Rastriya Swatantra Party से गठजोड़ क्यों है खास?
RSP खुद को नेपाल की एक नई, भ्रष्टाचार-विरोधी और सुधारवादी राजनीतिक पार्टी के रूप में पेश करती है। बालेन शाह के साथ गठजोड़ से पार्टी को कई तरह के राजनीतिक फायदे मिल सकते हैं।पहला, शहरी इलाकों और युवाओं के बीच पार्टी की पकड़ मजबूत हो सकती है। दूसरा, बालेन शाह की सोशल मीडिया पर मजबूत मौजूदगी पार्टी के संदेश को तेजी से आम लोगों तक पहुंचाने में मदद करेगी। तीसरा, यह गठजोड़ Anti-establishment राजनीति को नया चेहरा देता है, जो मौजूदा व्यवस्था से नाराज़ वोटरों को आकर्षित कर सकता है।
मार्च 2026 चुनावों पर क्या होगा असर?
अब तक नेपाल की राजनीति मुख्य रूप से Nepali Congress और CPN (UML) जैसे पारंपरिक दलों के इर्द-गिर्द घूमती रही है।बालेंद्र शाह की एंट्री से यह संतुलन बिगड़ता दिख रहा है।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि युवा और शहरी वोट बैंक में बड़ा बंटवारा हो सकता है वहीं पुराने दलों को अपने उम्मीदवार और एजेंडा पर पुनर्विचार करना पड़ेगा।चुनाव “पुरानी राजनीति बनाम नई राजनीति” की लड़ाई बन सकता है यदि बालेंद्र शाह युवाओं की लोकप्रियता को वोटों में बदलने में सफल रहते हैं, तो चुनावी नतीजे चौंकाने वाले हो सकते हैं
चुनौतियां
हालांकि बालेंद्र शाह की लोकप्रियता उनकी सबसे बड़ी ताकत है, वहीं चुनौतियां भी कम नहीं हैं। राष्ट्रीय राजनीति का उनका अनुभव सीमित माना जाता है। इसके अलावा, गठबंधन राजनीति को संभालना और स्थानीय प्रशासन के अनुभव को राष्ट्रीय स्तर पर लागू करना उनके लिए बड़ी परीक्षा होगी। आलोचकों का कहना हैं कि केवल लोकप्रियता से देश चलाना आसान नहीं होता।
नेपाल की राजनीति इस समय एक अहम मोड़ पर खड़ी है। एक रैपर से काठमांडू का मेयर और अब प्रधानमंत्री पद का दावेदार बना बालेन शाह का सफर सिर्फ एक व्यक्ति की कहानी नहीं है, बल्कि यह नेपाल के युवाओं की बदलती राजनीतिक सोच और उम्मीदों का प्रतीक है। मार्च में होने वाले चुनाव यह तय करेंगे कि यह बदलाव की आंधी केवल चर्चा तक सीमित रहती है या वास्तव में सत्ता तक पहुंचने में कामयाब होती है।