रिपोटिंग by Paras Saini
आज इलाहाबाद के वरिष्ठ कवि एवं वरिष्ठ आलोचक तथा पूर्व विभागाध्यक्ष हिंदी विभाग, इलाहाबाद विश्वविद्यालय स्मृतिशेष प्रो. राजेंद्र कुमार जी को याद करने के क्रम में उनके बंद रोड स्थित आवास पर स्मृति गोष्ठी आयोजित की गई जिसकी अध्यक्षता वरिष्ठ कवि हरीशचंद पांडेय ने की। इस अवसर पर अपने गुरु राजेंद्र कुमार को याद करते हुए प्रो. कुमार वीरेंद्र ने कहा कि राजेंद्र कुमार कविता के रास्ते ही साहित्य में दाखिल हुए। राजेंद्र कुमार की कविताएं सावधि होते हुए भी निर्रवधी है। उनका पहला काव्य संग्रह सन् 1978 में ऋण गुणा ऋण नाम से आया। उन्होंने उनकी कविता कुशल से जो भी हुए बेगाने हुए/बेगाने जो भी हुए चैन पा गए/ चाहता हूं बैचेन रहे हम सब/ बेगाने तो नहीं होंगे कम से कम कविता का पाठ करते हुए ‘बाबू रामसहाय दुखी हुए’ तथा’ लोहा लक्कड़’ पाठ भी किया।

काव्य संगोष्ठी की शुरुआत उनके सुपुत्र आलोचक प्रियम अंकित द्वारा उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए उनकी कविता “मैं अपनी लघुता में जैसा हूं” का पाठ करते हुए हुई। संगोष्ठी में तीनों पीढ़ियों द्वारा राजेंद्र कुमार के काव्य संकलनों (ऋण गुणा ऋण, उदासी का ध्रुपद,लोहा लक्कड़,हर कोशिश है एक बगावत) में संकलित कविताओं का पाठ किया। इस अवसर पर केतन यादव ने उनकी दो कविताएं ‘घोषणाएं कुछ भी नहीं बताती’, ‘साबुत दिल के बारिश’ तथा ‘कुछ भी नहीं किया मैंने सिर्फ प्यार’,अवनीश यादव ने ‘कार्डियोमेगैली’,’मेरा पता’ तथा ‘कविता और जीवन’, पारस सैनी ने ख़त्म न होंगे/कोई पीसे/कहीं पिसें हम/कभी पिसें हम/ख़त्म न होंगे कविता तथा ‘वही चाहता हूँ’, मनीता यादव ने ‘क्या फ़र्क पड़ता है’, सुमित पाल ने ‘मिट्टी’, किरन ने ‘गुलाब’ यश्या ने ‘अतिरिक्त चेहरे’ अंशी ने ‘हम तुम’ कवि गौड़ ने ‘मनसब मियां’ तथा ‘विपर्यय’ ज्योति ने ‘दयालु’ कविता आर्यन ने वागर्थ पत्रिका के मई अंक में प्रकाशित उनकी कविता ‘मां सरस्वती से’ , ‘वे जीते हारा लोकतंत्र’ भारतमाता की जै बोलो/ और रहो आश्वस्त/ कि हारे हुए लोकतंत्र के/ तुम प्रहरी हो! तथा उनके काव्य संकलन से ‘बेटे के अठारहवीं सालगिरह पर’ कविता का पाठ किया। संकट मोचन आर्य ने ‘दूब’ उज्ज्वल गुप्ता ने ‘दोस्ती का राज’ मारुति मानव ने ‘अच्छे दिन’,’रोटी’ तथा ‘राष्ट्रीय तकिया कलाम’, विश्वेंद्र यादव ने ‘सच की चोरी’ सिया ने ‘मैं क्षितिज को अपना आकाश समझता हूं’ तथा ‘आखिरी इच्छा’ राजेंद्र जी के सुपुत्र प्रेयस अंकित ने ‘पसीने पर लिखी कविता’ तथा ‘शब्द की कुदाल’, लखनऊ विश्वविद्यालय के शोधार्थी रणवीर ने ‘नामी आदमी’ इलाहाबाद विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग के सहायक आचार्य डॉ. अनिल यादव ने ‘शब्द और कवि’ हिंदी विभाग इलाहाबाद विश्वविद्यालय के सहायक आचार्य डॉ.अंशुमान कुशवाहा ने ‘आधा प’ सीएमपी डिग्री कॉलेज के हिंदी विभाग में सहायक आचार्य डॉ. प्रेमशंकर ने ‘जैदी का जूता’ तथा ‘भगत सिंह 100 बरस के बूढ़े के रूप में याद किए जाने के विरुद्ध’, अधिवक्ता आद्या प्रसाद पांडेय ने ‘उदासी का ध्रुपद’, के.के. पांडेय ने ‘सरस्वती’ तथा ‘साइबेरियन पक्षी’, प्रदीप पार्थिव ने ‘इतिहास और नदी, तथा ‘चिड़िया’, शशांक अनिरुद्ध ने ‘जल्द से जल्द’, सुनीता ने ‘हमारा समय’, नीलम शंकर ने ‘ जिंदगी के पांव’, अनीता गोपेश ने ‘कम से कम’, ‘दस्ताने उतार फेंकने का समय’, रिचा निगम ने ‘शब्द ने मुझसे कहा’, रश्मि ने ‘पोती का बनाया चिड़िया का चित्र’ तथा सरस्वती पत्रिका के संपादक अनुपम परिहार ने पुराने दिनों को याद करते हुए उनकी एक छोटी कविता पढ़ी।

आज की संगोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे शहर के वरिष्ठ कवि हरीशचंद पांडे ने अध्यक्षीय उद्बोधन में कवि की काव्यगत विशेषताओं और उनकी स्मृतियों को याद करते हुए उनकी कविता ‘मुक्तिकाम गांधी’ ‘एक तो पैमाना’,’रोशनी का दिया अंधेरा’ का पाठ किया।
इस अवसर पर यह घोषणा की गई कि प्रत्येक वर्ष राजेंद्र कुमार की पुण्यतिथि पर इसी तरह काव्य पाठ का आयोजन किया जायेगा। इस संगोष्ठी में इलाहाबाद विश्वविद्यालय के छात्र छात्राओं, शोधार्थी सहित शहर के गणमान्य नागरिक भी सम्मिलित हुए।
-लेखक इलाहाबाद विश्वविद्यालय से परास्नातक (एम.ए.) हिंदी साहित्य के छात्र हैं।