रिपोटिंग by Aryan Mishra
राम मिलन की कविताएं आधुनिकता को परिभाषित करती हैं : प्रो. कुमार वीरेंद्र
आज प्रयागराज पुस्तक मेले में रुद्रादित्य प्रकाशन समूह द्वारा पुस्तक लोकार्पण एवं परिचर्चा का आयोजन किया गया। इसमें डॉ. राम मिलन का कविता संग्रह ‘कांटो का हार पहन देखो’ का लोकार्पण हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत मंच पर उपस्थित अतिथियों को पुष्पगुच्छ देकर स्वागत करने से हुई।
कविता संग्रह पर लेखकीय वक्तव्य देते हुए डॉ. राम मिलन ने कहा ये कविताएं सामाजिक स्थितियों को देखते हुए लिखी गई हैं। उन्होंने अपनी एक कविता का पाठ भी किया। कविता संग्रह पर वक्तव्य देते हुए युवा कवि डॉ. अमरजीत राम ने कहा कि कविता संग्रह के शीर्षक के साथ साथ–राम मिलन जी का जीवन भी बहुत संघर्षमय रहा है। उन्होंने उनकी कविताओं के कलेवर पर बात करते हुए कहा कि उनकी कविताओं में यथार्थ है, समय से संवाद है। उन्होंने कहा कि उनकी कविताओं में हाशिए की आवाज है। अगले वक्ता के रूप में शिवानंद मिश्र जी ने कहा कि राम मिलन जी ने अपनी कविताओं से सामाजिक संस्थाओं को भी कटघरे में खड़ा किया है और वे अपनी कविताओं में नए शब्दों को भी गढ़ते हैं और स्त्रियों की आवाज को दर्ज़ करते हैं। अगले वक्ता के रूप में युवा आलोचक डॉ. दीनानाथ मौर्य ने कहा कि राम मिलन जी केवल आंखों का ही इलाज नहीं करते, बल्कि दृष्टि का भी इलाज अपनी कविताओं से करते हैं। उन्होंने कहा कि कविताओं की सार्थकता यही है कि उनकी कविताएं अपने समय के अंतर्विरोधों से टकराती हैं। उन्होंने कहा कि कवि अपनी कविताओं में संबोधन की शैली का प्रयोग करते हैं। बतौर विशिष्ट वक्ता कबीर पारख संस्थान से जुड़े देवेंद्र साहब ने कहा कि इस निराशा के दौर में कवि की कविताएं आशा फैलाने का काम करती हैं। उन्होंने कहा कि उनकी कविताओं में दलितों, महिलाओं, समाज के विकास को लेकर चिंतन है।अध्यक्षीय वक्तव्य देते हुए आलोचक व कार्यकारी संपादक प्रो. कुमार वीरेंद्र ने कहा कि डॉ.राम मिलन ने छंद को संवारने की अपेक्षा वस्तु तत्व को व्यवस्थित किया। अगर इन कविताओं में आप रूप की तलाश करेंगे तो आपको निराश होना पड़ सकता है, पीड़ा की अभिव्यक्ति प्रायः अनगढ़ होती है और अनगढ़ का अपना अलग सौंदर्य होता है। यह सौंदर्य राम मिलन जी की कविताओं में दिखाई देता है। उन्होंने अपनी कविता में दार्शनिक नज़र से स्वत्व की तलाश की। उनकी कविताओं में आधुनिकता को भी परिभाषित किया गया है। उन्होंने कहा कि उनकी कविताओं में मुहावरों का प्रयोग भी दिखाई देता है। कार्यक्रम का संचालन एवं धन्यवाद ज्ञापन करते हुए युवा आलोचक डॉ. अवनीश यादव ने कहा कि राम मिलन जी पेशे से नेत्र चिकित्सक होने के साथ कविताओं के सामाजिक चिकित्सक भी हैं। वे न सिर्फ़ आँखें, रोशनी बचाते हैं अपितु लेखनी के जरिए इंसानियत भी बचाते हैं, उनका काव्य संग्रह ‘कांटों का हार पहन देखो’ इसका मुकम्मल प्रमाण है|
कार्यक्रम में संगम लाल, अरिंदम घोष, डॉ अनिल कुमार यादव , अजय कुमार, कुलदीप, डॉ. ज्योति यादव, डॉ. उमेश यादव, डॉ. धारवेन्द्र त्रिपाठी , अभिषेक ओझा, मनीता यादव, नीरज, मारुति, प्रदीप पार्थिव, किरन, कोमल, केतन यादव, अभिजीत शुक्ला, ज्ञानेन्द्र द्विवेदी, संकटमोचन, अतुल, उज्ज्वल, पारस, सुमित, पूजा, आनंद यादव,विश्वेंद्र समेत बड़ी संख्या में इलाहाबाद विश्वविद्यालय के शोधार्थी, विद्यार्थी और शहर के नागरिक मौजूद रहे।