कहँवा के पीअर माटी, कथी के कुदार हे ?
कहवा के पाँच सोहागि, माटी कोड़े जास हे ?
गंगाजी के पीअर माटी, सोने के कुदार हे।
अजोधा के पाँच सोहागि, माटी कोड़े जास हे ।।
प्राचीन काल से मनुष्य तीन प्रत्यक्ष देवताओं की पूजा करता आया है-सूर्य. पृथ्वी और अग्नि । आज भी इनकी पूजा हमारी संस्कृति में विद्यमान है। भारत कृषि प्रधान देश है। विवाह के शुभ अवसर पर पृथ्वी की पूजा मिट्टी कोड़कर की जाती है।
मानर पूजने के बाद औरतें मिट्टी कोड़ने जाती हैं। मिट्टी कोड़ने में इस वात का ध्यान रखा जाता है कि बिना जुते हुए खेत से ही मिट्टी कोड़ी जाती है। मिट्टी कोड़ने के लिए एक-सवा बित्ता जमीन लीपकर धूप. दीप. अगरबत्ती जलाकर पान-कसैली रख दिया जाता है। फिर वर या वधू की माता के पीठ पर पाँच बार हल्दी का थापा मारा जाता है। परम्परा के अनुमार वर या वधू की माता कुदाल से मिट्टी कोड़ती है। फिर लड़के या कन्या की फूआ मिट्टी कोड़ती है। वह मिट्टी कोड़ने के लिए नेग मांगती हैं। इसी के सन्दर्भ में एक हिन्दी गीत इस प्रकार है..
“फूआ ! माटी जे कोड़ो तुझे नेग मिलेगी ।
फूआ ! गइया बछरूआ समेत मिलेगी ।।”
इसके बाद पाँच औरतों का जौ से आँचल भरा जाता है। इन सारी प्रक्रियाओं के दरम्यान औरतें गीत गाती रहती हैं। इन्हीं गीतों को ‘मटकोड़ा के गीत’ कहते हैं ।