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Somaliland Recognition by Israel – हॉर्न ऑफ अफ्रीका की राजनीति में एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। Israel ने सोमालीलैंड को एक स्वतंत्र देश के रूप में मान्यता देकर अंतरराष्ट्रीय मंच पर नई बहस छेड़ दी है। इज़रायल के इस फैसले के बाद कई मुस्लिम देशों, सोमालिया और अफ्रीकी संगठनों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है।
क्या है सोमालीलैंड?
Somaliland अफ्रीका के हॉर्न ऑफ अफ्रीका क्षेत्र में स्थित एक स्व-घोषित गणराज्य है, जो 1991 में गृहयुद्ध के बाद सोमालिया से अलग हुआ था। इसकी अपनी सरकार, मुद्रा और सुरक्षा बल हैं, लेकिन अब तक किसी भी बड़े देश से औपचारिक अंतरराष्ट्रीय मान्यता नहीं मिली थी।
इज़रायल का फैसला क्यों अहम?
इज़रायल द्वारा सोमालीलैंड को मान्यता देना इसलिए अहम माना जा रहा है क्योंकि यह पहला ऐसा देश है जिसने खुलकर इस क्षेत्र को स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में स्वीकार किया है। इज़रायली प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu की सरकार का तर्क है कि सोमालीलैंड लाल सागर और अदन की खाड़ी के पास स्थित होने के कारण रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है।विशेषज्ञों के अनुसार, यह कदम समुद्री व्यापार मार्गों, सुरक्षा सहयोग और क्षेत्रीय प्रभाव बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा हो सकता है।
मुस्लिम देशों और सोमालिया की प्रतिक्रिया
इज़रायल के इस निर्णय पर मुस्लिम देशों में गुस्सा देखा जा रहा है।सोमालिया ने इसे अपनी क्षेत्रीय अखंडता पर सीधा हमला बताया है।कई अरब देशों ने चेतावनी दी है कि यह कदम क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ा सकता है।African Union ने भी इज़रायल के फैसले पर आपत्ति जताते हुए कहा है कि अफ्रीका की सीमाओं से जुड़े मामलों में एकतरफा निर्णय स्वीकार्य नहीं हैं।
सोमालीलैंड की प्रतिक्रिया
सोमालीलैंड की सरकार ने इज़रायल के कदम का स्वागत करते हुए इसे “ऐतिहासिक और यादगार क्षण” बताया है। राजधानी हरगेइसा में सरकारी अधिकारियों का कहना है कि यह मान्यता अन्य देशों के लिए भी रास्ता खोल सकती है और सोमालीलैंड को वैश्विक पहचान दिलाने में मददगार होगी।
भू-राजनीतिक असर क्या होगा?
विश्लेषकों का मानना है कि यह फैसला हॉर्न ऑफ अफ्रीका की भू-राजनीति को नए सिरे से परिभाषित कर सकता है।क्षेत्र में इज़रायल का प्रभाव बढ़ सकता है।सोमालिया और इज़रायल के रिश्तों में और तनाव आ सकता है।मुस्लिम और अफ्रीकी देशों के बीच कूटनीतिक खींचतान तेज हो सकती है।अब सबकी नजर इस पर है कि क्या अन्य देश भी इज़रायल के कदम का अनुसरण करते हैं या विरोध के चलते यह मामला अंतरराष्ट्रीय मंचों तक सिमट कर रह जाता है। इतना तय है कि सोमालीलैंड को लेकर वैश्विक राजनीति में नई बहस शुरू हो चुकी है।इज़रायल द्वारा सोमालीलैंड को मान्यता देना केवल एक कूटनीतिक फैसला नहीं, बल्कि एक बड़ा भू-राजनीतिक संदेश है। इससे जहां सोमालीलैंड को नई उम्मीद मिली है, वहीं मुस्लिम देशों और अफ्रीकी संगठनों की नाराज़गी ने इस मुद्दे को और संवेदनशील बना दिया है।